￰अब घबरा गए हैं खुद से, भागे तो टकरा गए हैं खुद से। अब ना खुद रहे ना रही हैं वह गर्मजोशियां, नज़र भी अब नहीं मिला पा रहे हैं खुद से। क्या हम वहीं हैं जो दूसरों के लिए लड़ते थे, अब तो अपनी लड़ाई भी नहीं लड़ पा रहे हैं खुद से।

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बिहार में बहार है, बार-बार बदलाव है।

भारतीय इतिहास में 9 अगस्त का दिन कई घटनाओं के लिए याद किया जाता है। 9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने काकोरी में एक ट्रेन लूट ली। क्रांतिकारियों का मकसद…

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और डालीबाग छूट गया…

मानव जीवन में आना जाना, पाना छूटना आजीवन लगा रहता है एवं ऐसी परिस्थियों का सामना अधिकांशत: लोगों को करना पड़ता है। 2017 के उत्तर प्रदेश के आम चुनाव के…

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राजभवन से रायसीना तक

द्रोपदी मुर्मू के देश की 15वीं राष्ट्रपति बनने के बाद एक नई बहस ने अपना स्थान बना लिया है कि उनके राष्ट्रपति बनने से शोषित वंचित आदिवासी वनवासी समुदाय का…

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