लता मंगेशकर जी

 लता जी नहीं रहीं।

वह रहें या ना लेकिन उनकी यादें हमारे जेहन में आजीवन रह जायेंगी। उन्हें स्वर कोकिला की उपाधि दी गई है लेकिन उनको मात्र उनके गानों तक सिमटा कर रख देना उनके साथ ही नहीं बल्कि मानवता के साथ भी पक्षपात होगा क्योंकि उन्होंने मानवीय मूल्यों को बचाए रखने के लिए बहुत कार्य किया है।

चाहे वह अनाथों का नाथ बनने की बात रही हो या राष्ट्रीय एकता के लिए अपनी आवाज बुलंद करने की, लता जी सदैव देश एवं मानवता के साथ खड़ी नज़र आती थीं।

आज उनके जाने से मात्र देश का ही नहीं बल्कि मानवता का भी उतना ही नुकसान हुआ है। उन लोगों ने भी अपने अभिभावक रूपी देवी को हमेशा के लिए खो दिया है जिनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए लता जी ने निःस्वार्थ हर सम्भव मदद की है।

वर्तमान पीढ़ी सौभाग्यशाली है, जो उस दौर में पैदा हुई जिसने लता जी को साक्षात गाते हुए सुना। लता जी की आवाज मंदिर की घंटी जैसी थी जिसको सुनने के बाद मनोमस्तिष्क पवित्रमय हो उठता था।

कल वसन्त पंचमी पर सरस्वती माता आईं थीं और आज अपनी मानस पुत्री को साथ ले गईं। स्वरसाधिका स्वरदायिनी में समा गईं। आने वाली हर पीढ़ी लता मंगेशकर जी को सुनते हुए उनके दर्शन पाने वालों को धन्य कहेगी। 

लता मंगेशकर जी को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

Divyendu Rai

जिस दिन कुछ बन जाऊँगा, फिर बायोग्राफी में कुछ लिखने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी।

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