प्रभु राम के उदारहण से याद आता है कि मात्र चाहत से काम नहीं होता, बल्कि योग्यता भी प्रदर्शित करनी पड़ती है। प्रभु राम के उदारहण से याद आता है कि मात्र चाहत से काम नहीं होता, बल्कि योग्यता भी प्रदर्शित करनी पड़ती है।

प्रभु राम के उदारहण से याद आता है कि मात्र चाहत से काम नहीं होता, बल्कि योग्यता भी प्रदर्शित करनी पड़ती है। प्रभु राम के उदारहण से याद आता है कि मात्र चाहत से काम नहीं होता, बल्कि योग्यता भी प्रदर्शित करनी पड़ती है।

Divyendu Rai

जिस दिन कुछ बन जाऊँगा, फिर बायोग्राफी में कुछ लिखने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी।

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